राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने बताया कि शताब्दी वर्ष के तहत चलाए गए गृह संपर्क अभियान में संघ के स्वयंसेवकों ने देशभर के 4,63,340 गांवों और 41,825 नगरीय बस्तियों में 10.22 करोड़ से अधिक घरों तक पहुंच बनाई। इस दौरान संगठन की शाखाओं और सामाजिक गतिविधियों का विस्तार भी हुआ है।
गृह संपर्क अभियान और शाखाओं का विस्तार
सरकार्यवाह के अनुसार, इस अभियान के तहत लगभग 10,22,05,665 घरों में संघ के कार्यकर्ताओं की टीमें पहुंचीं और हर घर में 15 से 20 मिनट संघ की विचारधारा और शताब्दी वर्ष की यात्रा के बारे में चर्चा की। देश में संघ की दैनिक शाखाओं की संख्या बढ़कर 99,423 हो गई है, जो 63,208 स्थानों पर संचालित हो रही हैं। पिछले वर्ष की तुलना में दैनिक शाखाओं में 12,025 और शाखाओं के स्थानों में 8,156 की वृद्धि हुई है। इसके अलावा, 26,826 स्थानों पर 34,982 साप्ताहिक मिलन और 13,363 स्थानों पर 14,096 मासिक मंडलियां चल रही हैं।
देशभर में हिंदू सम्मेलनों और सामाजिक बैठकों का आयोजन
शताब्दी वर्ष के दौरान सामाजिक समरसता और सकारात्मक जीवनशैली को बढ़ावा देने के लिए देशभर में 65,664 हिंदू सम्मेलनों का आयोजन किया गया। इन सम्मेलनों में कुल 4,93,76,694 लोग शामिल हुए, जिनमें 2.5 करोड़ से अधिक महिलाएं थीं। ये कार्यक्रम 3,08,449 गांवों, 37,080 ग्रामीण मंडलों और 28,584 नगरीय बस्तियों में हुए। अरुणाचल प्रदेश, लद्दाख और अंडमान जैसे दूरदराज के क्षेत्रों में भी सम्मेलन आयोजित किए गए। साथ ही, 5,028 ग्रामीण खंडों और 3,318 नगरों में 8,346 सामाजिक सद्भाव बैठकों का आयोजन हुआ, जिनमें 3,79,581 समाज के प्रमुखों ने हिस्सा लिया।
युवा और जन जागरूकता कार्यक्रम
युवाओं को जोड़ने के लिए 21,237 स्थानों पर महाविद्यालयीन विद्यार्थियों के लिए 57,243 कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें 31,26,404 विद्यार्थियों ने भाग लिया। युवा व्यवसायियों के लिए हुए 14,285 कार्यक्रमों में 6,90,835 युवाओं ने हिस्सा लिया। कुल मिलाकर 38,17,239 युवाओं ने इन कार्यक्रमों में भागीदारी की। इसके अलावा, 3,207 प्रमुख जन गोष्ठियां आयोजित की गईं, जिनमें 4,29,262 प्रमुख समाजजन शामिल हुए।
प्राकृतिक आपदाओं में राहत कार्य
सरकार्यवाह ने बताया कि विभिन्न राज्यों में प्राकृतिक आपदाओं के दौरान संघ के स्वयंसेवकों ने राहत कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाई। उदाहरण के लिए, चित्रकूट में मंदाकिनी नदी में आई बाढ़ के बाद 350 स्वयंसेवकों ने प्रभावित परिवारों को राहत किट और भोजन उपलब्ध कराया। लखनऊ में भी 300 से अधिक स्वयंसेवकों ने बाढ़ प्रभावितों की मदद की। असम के शिवसागर और जोरहाट जिलों में 1,600 से अधिक स्वयंसेवकों ने 42,200 परिवारों तक भोजन, पानी और दवाइयां पहुंचाईं। इसके लिए पांच करोड़ रुपये से अधिक की राशि जुटाई गई। ओडिशा और आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्रों में चक्रवात प्रभावित इलाकों में भी स्वयंसेवक सहायता कार्य कर रहे हैं।
नशे के खिलाफ सामाजिक जागरूकता
बैठक में युवाओं में बढ़ते नशे के प्रचलन पर चिंता जताई गई। सरकार्यवाह ने कहा कि संघ सामाजिक संस्थाओं के साथ मिलकर नशे के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास करेगा। उन्होंने बताया कि नशे के अंतरराष्ट्रीय व्यापार और षड्यंत्र से युवाओं को बचाने में प्रशासन और सरकार भी सहयोग कर रही है। नशे की लत से प्रभावित लोगों के पुनर्वास के लिए भी योजना बनाई जा रही है।
तीन ऐतिहासिक व्यक्तित्वों को याद किया गया
सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने तीन महान व्यक्तित्वों के योगदान को याद किया। राजनारायण बसु की 200वीं जयंती पर उनके सामाजिक और राष्ट्रीय कार्यों को सम्मानित किया गया। स्वामी श्रद्धानंद के बलिदान के 100वें वर्ष पर उनकी शुद्धिकरण आंदोलन में भूमिका को याद किया गया। स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती के जन्म के 100वें वर्ष पर उनके जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा, स्वावलंबन और कृषि कार्यों का स्मरण किया गया।
सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत के तीन देशों के दौरे
सरकार्यवाह ने बताया कि अगस्त और सितंबर में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने तीन देशों का दौरा किया। उन्होंने विश्व एकता और मानव एकता का संदेश दिया और विभिन्न सामाजिक प्रतिनिधियों तथा विद्वानों से मुलाकात की। इस दौरान वे स्वामीनारायण मंदिर, खालसा गुरुद्वारा और जैन मंदिर भी गए।
सोशल मीडिया और परिवार पर सरकार्यवाह की राय
दत्तात्रेय होसबाले ने सोशल मीडिया पर अनावश्यक सामग्री के प्रसार को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि तकनीक को रोकना संभव नहीं है, लेकिन सरकार और सामाजिक नेतृत्व मिलकर कानून बनाने की आवश्यकता हो तो वह किया जाना चाहिए। उन्होंने परिवार में संस्कार और अनुशासन पर जोर देते हुए कहा कि मोबाइल छोड़कर परिवार के सदस्य एक साथ बैठकर सकारात्मक विषयों पर चर्चा करें।
युवा पीढ़ी की आकांक्षाओं को समझने का आग्रह
सरकार्यवाह ने कहा कि देश में सत्ता परिवर्तन चुनाव के माध्यम से होता है और अराजकता से यह संभव नहीं है। नई पीढ़ी के साथ सकारात्मक संवाद जरूरी है ताकि उनकी ऊर्जा और आक्रोश को सही दिशा दी जा सके। समाज के अच्छे सोचने वाले लोगों को सक्रिय भूमिका निभानी होगी ताकि अराजक शक्तियां हावी न हों।
महिलाओं की भागीदारी पर विशेष ध्यान
दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि संघ और समाज अलग नहीं हैं और पूरे समाज को संगठित करना संघ का लक्ष्य है। पंच परिवर्तन और सामाजिक बदलाव में महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है। संघ का कार्य दुर्गम और चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों जैसे अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, त्रिपुरा, केरल और पश्चिम बंगाल में भी बढ़ रहा है।
मुख्य बिंदु
- संघ ने 10.22 करोड़ से अधिक घरों तक पहुंच बनाई।
- देश में 1,03,397 स्थानों पर संघ की गतिविधियां जारी हैं।
- 65,664 हिंदू सम्मेलनों में 4.93 करोड़ से अधिक लोग शामिल हुए।
- 38 लाख से अधिक युवाओं ने कार्यक्रमों में भाग लिया।
- प्राकृतिक आपदाओं में स्वयंसेवकों ने राहत कार्य किए।
स्रोत: hindi.webdunia.com


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