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शनिवार, 31 अक्टूबर 2026
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पोलैंड में संवैधानिक ट्रिब्यूनल पर टस्क और राष्ट्रपति के बीच विवाद

पोलैंड में प्रधानमंत्री टस्क और राष्ट्रपति नावरोत्स्की के बीच संवैधानिक ट्रिब्यूनल के नियंत्रण को लेकर विवाद बढ़ गया है।

पोलैंड में संवैधानिक ट्रिब्यूनल पर टस्क और राष्ट्रपति के बीच विवाद

पोलैंड की राजधानी वारसॉ में 2015 में संवैधानिक संकट गहरा गया है। प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने संवैधानिक ट्रिब्यूनल के प्रमुख को हटाने के बाद नए न्यायाधीश नियुक्त किए, लेकिन राष्ट्रपति करोल नावरोत्स्की ने उन्हें शपथ ग्रहण करने से रोक दिया। इसके बावजूद न्यायाधीश ट्रिब्यूनल भवन में पहुंच गए और स्थिति तनावपूर्ण हो गई। राष्ट्रपति ने अपनी विदेश यात्रा बीच में ही छोड़कर वापस आकर ट्रिब्यूनल पहुंचे, जहां सुरक्षाकर्मियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई।

संवैधानिक ट्रिब्यूनल पर नियंत्रण को लेकर विवाद

राष्ट्रपति नावरोत्स्की ने ट्रिब्यूनल के अंदर जाकर उन न्यायाधीशों को स्पष्ट कहा कि जिन्होंने शपथ नहीं ली, वे न्यायाधीश नहीं हैं। टस्क सेंट्रिस्ट-लेफ़्टिस्ट गठबंधन के नेता हैं जबकि राष्ट्रपति दक्षिणपंथी "लॉ एंड जस्टिस पार्टी" से हैं। ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के निलंबन ने विवाद को तख्तापलट की आशंका तक पहुंचा दिया है। यह पूरा मामला संवैधानिक ट्रिब्यूनल पर नियंत्रण को लेकर टकराव की तरह उभरा है।

राष्ट्रपति ने सरकार पर संवैधानिक उल्लंघन का आरोप लगाया

शनिवार को राष्ट्रपति नावरोत्स्की ने सरकार पर संवैधानिक व्यवस्था का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। उन्होंने कानून व्यवस्था बहाल करने और संसदीय दलों के साथ तत्काल परामर्श बैठक बुलाने का आह्वान किया। उनके कार्यालय ने कहा कि रातोंरात संवैधानिक व्यवस्था का उल्लंघन हुआ और एक संवैधानिक अंग पर जबरन कब्जा कर लिया गया।

सुरक्षा बलों को ट्रिब्यूनल से हटाने की मांग

नावरोत्स्की ने कहा कि सरकार द्वारा तैनात सुरक्षा बलों को ट्रिब्यूनल परिसर से बाहर जाना चाहिए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व अध्यक्ष जबिग्न्यू कपिंस्की से भी चर्चा की, जिन्होंने सत्ता हथियाने वाली कार्रवाइयों को कानूनी नहीं माना। नावरोत्स्की ने कानूनी व्यवस्था की बहाली की मांग की।

आपातकालीन परामर्श बैठक और राजनीतिक प्रतिक्रिया

राष्ट्रपति ने संवैधानिक ट्रिब्यूनल के कानूनी रूप से नियुक्त उपाध्यक्ष बार्टलोमी सोचांस्की को संस्थान में प्रवेश कराने में मदद की। आंतरिक सुरक्षा की चिंता के बीच उन्होंने संसदीय दलों के प्रतिनिधियों के साथ तत्काल परामर्श बैठक बुलाने का निर्णय लिया ताकि राजनीतिक स्थिरता और संवैधानिक व्यवस्था बहाल हो सके।

पोलैंड के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री सिकोरस्की ने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति बहुमत से चुने गए लोगों को काम करने से रोक रहे थे। उन्होंने बताया कि न्यायाधिकरण को पुनः सक्रिय करने के लिए कदम जरूरी थे। जज अन्ना कोरविन-पियोट्रोव्स्का ने न्यायाधीशों और कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर पुलिस तैनाती की मांग की थी।

मुख्य तथ्य

  • प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने संवैधानिक ट्रिब्यूनल के प्रमुख को हटाकर नए जज नियुक्त किए।
  • राष्ट्रपति करोल नावरोत्स्की ने नए जजों को शपथ नहीं दिलाई और ट्रिब्यूनल में पहुंच गए।
  • राष्ट्रपति ने सरकार पर संवैधानिक व्यवस्था का उल्लंघन करने का आरोप लगाया।
  • सिकोरस्की ने कहा कि न्यायाधिकरण को फिर से काम करने के लिए कदम जरूरी थे।

स्रोत: livetimes.news

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