दिल्ली हाईकोर्ट ने नेहा बोरा की याचिका खारिज कर पीस बॉन्ड साइन करने का आदेश दिया था, लेकिन नेहा ने इसके खिलाफ अपनी मजबूती बरकरार रखी है और पीस बॉन्ड पर दस्तखत करने से साफ मना कर दिया है। उन्होंने इसे नागरिकों के अधिकारों पर हमला बताया है।
हाईकोर्ट ने याचिका क्यों खारिज की?
एसईएम ने नेहा बोरा को शांति बनाए रखने के लिए पीस बॉन्ड साइन करने का नोटिस जारी किया था। इसके खिलाफ नेहा ने 17 अक्टूबर को दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। 23 अक्टूबर को जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने इस याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि एसईएम के पास नोटिस जारी करने के लिए पर्याप्त और विधिक आधार थे और यह फैसला केवल अफवाहों पर आधारित नहीं था।
सुनवाई के दौरान जस्टिस ने बताया कि जिस क्षेत्र से नेहा बोरा को हिरासत में लिया गया था, वह एक व्यावसायिक और मुख्य मार्गों से जुड़ा इलाका है, जहां कानून-व्यवस्था बनाए रखना जरूरी था। इसलिए एसईएम का कदम कानूनी रूप से सही था।
नेहा बोरा ने क्या कहा?
हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद नेहा बोरा ने पीस बॉन्ड पर दस्तखत करने से साफ इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि पीस बॉन्ड अब नागरिकों के मौलिक और संवैधानिक अधिकारों को दबाने का एक उपकरण बन गया है। साथ ही उन्होंने चिंता जताई कि इसका इस्तेमाल भविष्य में देश के किसी भी हिस्से में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने वाले लोगों की आवाज दबाने के लिए मिसाल बनाए जाने के लिए किया जाएगा।
मामले की पृष्ठभूमि
नेहा बोरा को 16 अक्टूबर को निवारक हिरासत में लिया गया था, जब वह कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा आयोजित 'लहरा दो तिरंगा' मार्च में शामिल होने जा रही थीं। अगले दिन उन्हें रिहा कर दिया गया। इसके बाद मजिस्ट्रेट ने नेहा को 10,000 रुपए का पर्सनल बॉन्ड भरने और एक जमानतदार पेश करने का निर्देश दिया था, ताकि जांच के दौरान शांति बनी रहे।
नेहा बोरा कौन हैं?
नेहा बोरा ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष हैं। वह छात्रों के अधिकारों, शैक्षणिक मुद्दों और सामाजिक-राजनीतिक विषयों पर मुखर रहती हैं। हाल ही में उन्होंने SIR में कथित अनियमितताओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों में सक्रिय भूमिका निभाई है। वे नागरिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की आजादी के लिए लगातार आवाज उठाती रही हैं।


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