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शनिवार, 31 अक्टूबर 2026
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मनीषा भानवाला ने पिता की याद में विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में जीता गोल्ड

मनीषा भानवाला ने पिता के निधन के बाद विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर अपने परिवार का सपना पूरा किया।

मनीषा भानवाला ने पिता की याद में विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में जीता गोल्ड

हरियाणा के जींद की रेसलर मनीषा भानवाला ने 29 साल की उम्र में विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। यह जीत उनके लिए खास थी क्योंकि यह उनके दिवंगत पिता सुरेश के सपने को पूरा करने का पल भी था, जिनका निधन 2022 में मनीषा के एशियाई चैंपियनशिप के लिए रवाना होने वाले दिन हो गया था।

पिता के निधन के बाद कैसे बनी विश्व चैंपियन?

मनीषा एक किसान परिवार से आती हैं जहां खेलों का माहौल रहा है। उनके भाई रिंकू कबड्डी खिलाड़ी हैं और भाभी ममता सिहाग भी रेसलर हैं। रिंकू ने बताया कि मनीषा को उनके कबड्डी खेलते हुए देखकर खेलों में रुचि हुई। पिता का निधन उस दिन हुआ जब मनीषा एशियाई चैंपियनशिप के लिए मंगोलिया रवाना होने वाली थीं। परिवार ने मनीषा को समझाया कि कुश्ती छोड़ने से उनके पिता का सपना अधूरा रह जाएगा, जिसके बाद वे मंगोलिया गईं।

माता-पिता की तस्वीर वाली टी-शर्ट से दी श्रद्धांजलि

अस्ताना के लिए रवाना होने से पहले मनीषा ने अपने माता-पिता की तस्वीरों वाली सफेद टी-शर्ट बनवाई थी, जिसे उन्होंने गोल्ड जीतने के बाद गर्व से दर्शकों को दिखाई। उनके भाई रिंकू ने बताया कि यह टी-शर्ट उनके परिवार का सपना पूरा होने का प्रतीक थी और मनीषा ने इसे पूरा कर दिखाया।

गोल्ड मेडल मुकाबला और मनीषा की जीत

गोल्ड मेडल मैच में मनीषा का सामना अमेरिकी खिलाड़ी अबीगेल नेट्टे से हुआ। शुरुआती 0-6 की हार के बाद मनीषा ने शानदार वापसी करते हुए 8-6 से मैच अपने नाम किया। उन्होंने अपने करियर में विभिन्न वेट कैटेगिरी में मुकाबले खेले हैं और इस जीत को अपने करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि माना।

मुख्य तथ्य

  • मनीषा भानवाला ने 2022 में पिता के निधन के बाद विश्व चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता।
  • उनकी सफेद टी-शर्ट पर माता-पिता की तस्वीरें थीं, जिसे उन्होंने जीत के बाद दिखाया।
  • गोल्ड मेडल मैच में उन्होंने अमेरिकी खिलाड़ी को 8-6 से हराया।
  • मनीषा ने 59 किग्रा कैटेगिरी में यह खिताब हासिल किया।

यह जीत मनीषा के लिए केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं है, बल्कि उनके परिवार और खासकर उनके पिता के सपने की भी पूर्ति है। इससे भारत की महिला कुश्ती को एक नई पहचान मिली है।

स्रोत: indiatv.in

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