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मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026
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फ्रांस में फिर शुरू हुए विरोध-प्रदर्शन, पेरिस में संग्रहालय बंद, भारी पुलिस तैनाती

फ्रांस में विरोध-प्रदर्शन फिर शुरू, पेरिस के संग्रहालय बंद और 70,000 पुलिसकर्मी तैनात किए गए।

फ्रांस में फिर शुरू हुए विरोध-प्रदर्शन, पेरिस में संग्रहालय बंद, भारी पुलिस तैनाती

फ्रांस में फिर से विरोध-प्रदर्शनों का दौर शुरू हो गया है, जिसके चलते पेरिस में प्रमुख संग्रहालय बंद कर दिए गए हैं और बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स तैनात की गई है। सरकार हिंसा को रोकने के लिए कड़ी कार्रवाई कर रही है।

पेरिस में संग्रहालय बंद और भारी पुलिस बल

पेरिस में शनिवार को प्रमुख संग्रहालय जैसे 'लूर्व', 'ओरसे संग्रहालय', 'पिकासो संग्रहालय' और 'ग्रैंड पैलैस' को बंद कर दिया गया। यह कदम पिछले सप्ताह हुई हिंसा और उपद्रव की घटनाओं को देखते हुए उठाया गया। गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने बताया कि पूरे देश में लगभग 70,000 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। इसके अलावा हेलीकॉप्टर, बख्तरबंद वाहन और पानी की बौछार करने वाली गाड़ियां भी तैनात हैं। पिछले सप्ताह पांच लाख से अधिक लोग सड़कों पर उतर आए थे, इसलिए इस बार भी भारी भीड़ जुटने की आशंका है।

आर्ट बेसेल कार्यक्रम में बदलाव

दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित समकालीन कला मेलों में से एक 'आर्ट बेसेल' को शुक्रवार को जनता के लिए खोला गया था, लेकिन उपद्रव की आशंका के कारण वीकेंड के कार्यक्रमों को रद्द कर दिया गया। पेरिस के 'प्लेस डी ला रिपब्लिक' के पास बैंक शाखा और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को उपद्रवियों से बचाने के लिए लकड़ी के बड़े टुकड़ों से ढक दिया गया है।

दुकानदारों को सुरक्षा सलाह और नुकसान की जानकारी

पेरिस पुलिस ने उपद्रव के बाद दुकानदारों को प्राइवेट सिक्योरिटी गार्ड्स तैनात करने की सलाह दी, हालांकि बाद में स्पष्ट किया कि सरकार ही कारोबारियों और उनके प्रतिष्ठानों की सुरक्षा की जिम्मेदारी लेगी। पिछले सप्ताहांत पूरे फ्रांस में लगभग 3,000 दुकानों को नुकसान पहुंचाया गया या उनमें लूटपाट हुई।

नस्ली हमला और उसकी जांच

पेरिस के एक उपनगर में हुई गोलीबारी को नस्ली भेदभाव से प्रेरित हमला माना गया है, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और पांच अन्य घायल हुए। घटना के कुछ ही देर बाद संदिग्ध को गिरफ्तार कर लिया गया। फ्रांस के राष्ट्रीय आतंकवाद रोधी अभियोजक कार्यालय ने मामले की जांच शुरू कर दी है। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इसे "नस्ली भेदभाव से प्रेरित आतंकवादी हमला" बताया और कहा कि संदिग्ध ने पहले से साजिश रची थी। उन्होंने कहा, "लोगों को केवल उनकी त्वचा के रंग या धर्म के आधार पर निशाना बनाया गया। फ्रांस में ऐसी घटनाओं के लिए कोई जगह नहीं है।"

सरकार का सख्त रुख

फ्रांस में उपद्रव कर रहे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई शुरू हो चुकी है। राष्ट्रपति मैक्रों ने स्पष्ट किया है कि जिन्होंने भी तोड़फोड़ और तबाही मचाई है, उन्हें इसका भुगतान करना होगा।

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