देशभर में हुए एक सर्वे में पता चला है कि प्री प्राइमरी क्लासेज में छात्रों को स्कूल लाइफ पसंद आती है, लेकिन 12वीं तक आते-आते वे अपनी स्कूल लाइफ से असंतुष्ट हो जाते हैं। CISCE और IC3 इंस्टीट्यूट द्वारा कराए गए इस सर्वे में 12वीं क्लास के 59 फीसदी छात्र स्कूल जीवन से संतुष्ट नहीं पाए गए।
CISCE और IC3 ने किया सर्वे
यह सर्वे काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन (CISCE) और IC3 इंस्टीट्यूट ने मिलकर कराया है। रिपोर्ट का नाम ‘स्टूडेंट वेल-बीइंग पल्स रिपोर्ट 2025-26’ है। इस सर्वे में देश के 8,515 छात्रों ने हिस्सा लिया।
12वीं के छात्रों की असंतुष्टि और 8वीं के संतोष
सर्वे के अनुसार 12वीं के केवल 19 फीसदी छात्र स्कूल जीवन से उच्च संतुष्ट हैं। वहीं, 8वीं कक्षा के 57 फीसदी छात्रों ने अपनी स्कूल लाइफ से संतुष्टि जताई जबकि केवल 23 फीसदी ने कम संतुष्टि बताई।
उम्र बढ़ने पर खुशी और आत्मविश्वास में गिरावट
रिपोर्ट बताती है कि जैसे-जैसे छात्र बड़ी कक्षा में पहुंचते हैं, उनकी सकारात्मक भावनाएं कम होती हैं। 8वीं कक्षा में 65 फीसदी छात्र अक्सर खुश रहते हैं, यह आंकड़ा 12वीं में 48 फीसदी रह जाता है। आत्मविश्वास भी 64 फीसदी से घटकर 47 फीसदी हो गया है।
12वीं के छात्र अधिक तनाव और चिंता में
सर्वे में यह भी दिखा कि 12वीं के छात्र चिंता और कम ऊर्जा महसूस करने में अधिक हैं। 8वीं में 22 फीसदी छात्र अक्सर चिंता करते हैं, जो 12वीं में बढ़कर 37 फीसदी हो जाता है। कम ऊर्जा महसूस करने वाले छात्रों की संख्या भी 27 फीसदी से 44 फीसदी हो गई है। इसके बावजूद 63 फीसदी छात्रों ने अपनी निजी जिंदगी से संतुष्टि जताई है।
छात्रों के भावनात्मक स्वास्थ्य पर ध्यान जरूरी
रिपोर्ट में कहा गया है कि एग्जाम नंबर या बोर्ड के परिणामों से छात्रों के भावनात्मक स्वास्थ्य का सही आकलन करना मुश्किल है। इसलिए जरूरी है कि स्कूलों में मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य के लिए बेहतर और आसानी से उपलब्ध सुविधाएं हों।
स्रोत: tv9hindi.com


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