नई दिल्ली। चाइल्ड पोर्नोग्राफी पर प्रतिबंध लगाने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने कहा कि इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए एक राष्ट्रीय पॉलिसी फ्रेमवर्क तैयार किया जा रहा है। यह फ्रेमवर्क न केवल बच्चों से संबंधित अश्लील सामग्री के प्रसार को रोकने पर केंद्रित होगा, बल्कि वयस्कों की बिना सहमति के अश्लील सामग्री साझा करने के मामलों को भी शामिल करेगा।
केंद्र सरकार की गंभीरता और प्रस्तावित फ्रेमवर्क
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि प्रस्तावित पॉलिसी केवल चाइल्ड पोर्नोग्राफी तक सीमित नहीं रहेगी। इसमें बिना सहमति के अश्लील कंटेंट शेयर करने और इससे जुड़ी अन्य चुनौतियों से निपटने के उपाय भी शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से ले रही है और प्रभावी नियंत्रण के लिए व्यापक कदम उठाएगी।
एआई और मॉर्फ्ड तस्वीरों पर चिंता
तुषार मेहता ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से तैयार की जा रही अश्लील सामग्री, मॉर्फ्ड तस्वीरों और उन तस्वीरों के बढ़ते मामलों पर चिंता जताई जिनमें किसी व्यक्ति के चेहरे और शरीर का मेल वास्तविकता से नहीं होता। उन्होंने कहा कि डिजिटल माध्यमों पर इस तरह के कंटेंट के प्रसार को रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था जरूरी है।
इंटरनेट प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारियां बढ़ाने की योजना
एसजी ने अदालत को बताया कि प्रस्तावित विधेयक में इंटरनेट प्लेटफॉर्म और अन्य मध्यस्थों की जिम्मेदारियों को बढ़ाया जा सकता है। उनकी भूमिका केवल आपत्तिजनक कंटेंट हटाने तक सीमित नहीं होगी, बल्कि ऐसे कंटेंट के अपलोड होने पर संबंधित अधिकारियों को सूचना देने की जिम्मेदारी भी दी जा सकती है।
शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया में सुधार
केंद्र सरकार ने यह भी बताया कि प्रस्तावित फ्रेमवर्क के तहत शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया का दायरा बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। इसके तहत न केवल पीड़ित व्यक्ति, बल्कि कोई तीसरा व्यक्ति भी सद्भावना के साथ शिकायत दर्ज करा सकेगा, जिससे कानून प्रवर्तन में आसानी होगी।
संकट से निपटने के लिए नीतिगत स्तर पर प्रयास
सरकार के अनुसार, इस पॉलिसी फ्रेमवर्क का उद्देश्य बिना सहमति के अश्लील सामग्री साझा करने, एआई से उत्पन्न आपत्तिजनक कंटेंट और मॉर्फ्ड तस्वीरों के प्रसार से जुड़ी चुनौतियों का समाधान करना है। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर नीतिगत स्तर पर गंभीर विचार किया जा रहा है।


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