इजरायल में राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग ने राजनीतिक दलों से लगातार दूसरी दिन चर्चा की ताकि यह तय किया जा सके कि अगली सरकार बनाने की जिम्मेदारी किसे दी जाए। हाल के चुनाव में न तो बेंजामिन नेतन्याहू और न ही गादी आइजेनकोट को स्पष्ट बहुमत मिला है, लेकिन आइजेनकोट को अरब पार्टियों का समर्थन मिला है, जिससे उनकी स्थिति मजबूत हुई है।
मुख्य तथ्य
- अरब बहुल पार्टियों ने चुनाव में 19 सीटें हासिल की हैं।
- जॉइंट लिस्ट ने आइजेनकोट का समर्थन करने का फैसला किया है।
- नेतन्याहू के गठबंधन के पास 53 सीटें हैं, जबकि आइजेनकोट के विपक्षी खेमे के पास 48।
- सरकार बनाने के लिए चुने गए नेता को 28 दिन का समय मिलेगा।
- नेतन्याहू विदेशी फंडिंग के आरोप लगाते रहे हैं।
अरब पार्टियों ने आइजेनकोट को समर्थन दिया
इजरायल के चुनाव में अरब बहुल राजनीतिक दलों ने 19 सीटें जीती हैं और उनकी भूमिका सरकार गठन में निर्णायक हो सकती है। जॉइंट लिस्ट ने सर्वसम्मति से यह फैसला लिया कि वे आइजेनकोट का समर्थन करेंगे। उनका मकसद नेतन्याहू को सत्ता में वापस आने से रोकना है।
हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि ये पार्टियां आइजेनकोट के गठबंधन में औपचारिक रूप से शामिल होंगी या नहीं। विपक्षी खेमे ने नेतन्याहू की नीतियों को चुनौती देने में और अरब नागरिकों के खिलाफ कथित भड़काऊ बयानों को रोकने में अभी तक पर्याप्त इच्छाशक्ति नहीं दिखाई है, यह जॉइंट लिस्ट ने माना है।
सरकार बनाने की प्रक्रिया और समय सीमा
राष्ट्रपति हर्जोग उस नेता को सरकार बनाने का अधिकार देंगे जिसे सबसे अधिक सांसदों का समर्थन प्राप्त होगा। इस नेता को 28 दिन का समय मिलेगा, जिसे जरूरत पड़ने पर 14 दिन और बढ़ाया जा सकता है। यदि वह समयसीमा में सरकार बनाने में असफल रहता है, तो राष्ट्रपति किसी अन्य सांसद को यह जिम्मेदारी सौंप सकते हैं।
नेतन्याहू और आइजेनकोट की वर्तमान स्थिति
| नेता | संसदीय सीटें |
|---|---|
| बेंजामिन नेतन्याहू | 53 |
| गादी आइजेनकोट | 48 |
हालांकि नेतन्याहू के पास संसदीय सीटों की संख्या अधिक है, लेकिन अरब बहुल दलों का आइजेनकोट को समर्थन देना उनकी स्थिति को मजबूत कर सकता है। नेतन्याहू की दक्षिणपंथी सरकार को गाजा और वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनियों के प्रति उनके रुख के कारण आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है।
आइजेनकोट के लिए यह समर्थन विपक्षी खेमे में कुछ मतभेद भी पैदा कर सकता है, खासकर अविग्दोर लिबरमैन जैसे सांसदों के बीच, जो नेतन्याहू के पूर्व सहयोगी रह चुके हैं और अब उनके मुखर आलोचक हैं।
नेतन्याहू की प्रतिक्रिया
बेंजामिन नेतन्याहू ने विपक्ष पर अरब सांसदों के साथ गठबंधन बनाने की संभावनाओं को लेकर आलोचना की है। उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय में रिकॉर्ड किए गए एक वीडियो में विदेशी ताकतों की ओर से चुनाव प्रचार में फंडिंग किए जाने के आरोप लगाते हुए गंभीर संदेह व्यक्त किए हैं।
स्रोत: hindi.webdunia.com


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