वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक समाधान के प्रयासों में एक नया प्रस्ताव सामने आया है, जिसमें ईरान अपने संवर्धित यूरेनियम के भंडार को किसी तीसरे देश को सौंपने या संवर्धन कम करने पर सहमत हो सकता है। इसके बदले अमेरिका ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों में राहत देने पर विचार कर रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अभी ईरान पर हमले को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है।
मुख्य तथ्य
- ईरान अपने संवर्धित यूरेनियम को तीसरे देश को सौंपने पर विचार कर रहा है।
- अमेरिका प्रतिबंधों में राहत देने की संभावना तलाश रहा है।
- चीन को समझौते की निगरानी का गारंटर बनाने का प्रस्ताव है।
- तुर्किये के इस्तांबुल के बजाय कतर की दोहा को वार्ता स्थल बनाने की बात है।
- ट्रंप ने ईरान पर हमले के फैसले को टाल दिया है।
समझौते का मसौदा और मध्यस्थ देशों की भूमिका
अल अरबिया की रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित समझौते में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत के लिए तुर्किये के इस्तांबुल के बजाय कतर की राजधानी दोहा को चुना गया है। समझौते का लक्ष्य दोनों देशों के बीच परमाणु विवाद को कम करना और युद्धविराम को बढ़ावा देना है। इसे लागू करने से पहले एक स्वतंत्र सत्यापन तंत्र बनाया जाएगा, जो दोनों पक्षों की शर्तों के पालन की जांच करेगा। किसी भी उल्लंघन की स्थिति में मध्यस्थ और गारंटर देशों द्वारा समाधान निकाला जाएगा।
इस बीच, कतर का एक प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को तेहरान पहुंचा और शनिवार को लगभग 12 घंटे तक दोनों पक्षों के बीच बैठक हुई, जिसे क्षेत्रीय तनाव कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कूटनीतिक प्रयास माना जा रहा है।
ईरान का रुख और सैन्य तैयारियां
ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने सशस्त्र बलों के वरिष्ठ कमांडरों को संभावित हमले का तत्काल और प्रभावी जवाब देने का निर्देश दिया है। उनके संदेश में कहा गया है कि ईरान अपनी सुरक्षा के लिए हर खतरे का जवाब भौगोलिक सीमाओं से परे जाकर देने के लिए तैयार रहना चाहिए। उन्होंने सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने पर भी जोर दिया।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका के साथ सीधे बातचीत की खबरों को खारिज करते हुए कहा कि फिलहाल तेहरान मध्यस्थों के माध्यम से ही बातचीत करना चाहता है। उन्होंने स्वीकार किया कि मध्यस्थों के जरिए परमाणु कार्यक्रम से संबंधित एक प्रस्ताव मिला है, जिसे समीक्षा की जा रही है। उन्होंने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के पत्र को सकारात्मक कदम बताया।
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अराघची ने कहा कि ईरान की शर्तें मान ली जाएं तो इसे दो दिनों के भीतर खोल दिया जाएगा, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण है।
ट्रंप ने हमले पर फैसला क्यों टाला?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि युद्ध समाप्ति को लेकर जल्दबाजी नहीं करना चाहते। उन्होंने बताया कि बातचीत जारी है और समय अमेरिका के पक्ष में है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भी स्पष्ट किया कि ट्रंप ने ईरान पर हमले को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है। यह संकेत देता है कि सैन्य विकल्प अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
अमेरिकी हमले में मछुआरों के लापता होने का आरोप
ईरानी मीडिया आईआरआईबी ने अमेरिकी सेना पर होर्मुजगान प्रांत के केश्म द्वीप के पास मछली पकड़ने वाली दो नौकाओं पर हमला करने का आरोप लगाया है। इस हमले में दो मछुआरों के लापता होने और एक घायल होने की खबर है, हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
अमेरिका-ईरान विवाद क्यों महत्वपूर्ण है?
अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम, आर्थिक प्रतिबंध और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे संवेदनशील मुद्दों पर चल रही कूटनीतिक बातचीत का असर पूरे पश्चिम एशिया के तनाव पर पड़ेगा। मध्यस्थ देशों की कोशिशें किसी ठोस समझौते तक पहुंचने में कारगर साबित होंगी या संघर्ष और बढ़ेगा, यह भविष्य में तय होगा।
स्रोत: deshbandhu.co.in


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