एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित को 31 अक्टूबर 2026 से भारतीय वायुसेना का नया प्रमुख नियुक्त किया गया है। वह देश के 29वें वायुसेना प्रमुख होंगे, जो एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह के स्थान पर कार्यभार संभालेंगे।
मुख्य जानकारी
- आशुतोष दीक्षित ने 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना में कमीशन प्राप्त किया था।
- उनका जन्म 9 दिसंबर 1966 को हुआ था।
- उन्होंने 3,500 घंटे से अधिक उड़ान का अनुभव हासिल किया है।
- उनका कार्यकाल 31 दिसंबर 2028 तक रहेगा।
शैक्षिक पृष्ठभूमि और शुरुआत
एयर मार्शल दीक्षित ने नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA), डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज और नेशनल डिफेंस कॉलेज से अपनी शिक्षा पूरी की है। 6 दिसंबर 1986 को उन्हें भारतीय वायुसेना के फाइटर स्ट्रीम में कमीशन मिला था।
उड़ान और सैन्य अनुभव
दीक्षित के पास 3,500 घंटे से अधिक उड़ान का अनुभव है और वे 20 से अधिक प्रकार के विमानों को उड़ा चुके हैं। उन्होंने टेस्ट पायलट और फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर के रूप में भी कार्य किया है। उनके सैन्य करियर में परिचालन और प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी शामिल रही हैं।
प्रमुख पद और जिम्मेदारियां
उन्होंने नंबर 9 स्क्वाड्रन को मिराज-2000 लड़ाकू विमानों से लैस करने का कार्य संभाला। इसके बाद उन्होंने पश्चिमी क्षेत्र के अग्रिम लड़ाकू वायुसेना स्टेशन और दक्षिणी क्षेत्र के प्रमुख फाइटर ट्रेनिंग बेस की कमान संभाली। वे दक्षिणी वायु कमान में एयर डिफेंस कमांडर भी रह चुके हैं।
इसके अलावा, वायुसेना मुख्यालय में असिस्टेंट चीफ ऑफ द एयर स्टाफ (प्रोजेक्ट्स) और असिस्टेंट चीफ ऑफ द एयर स्टाफ (प्लान्स) जैसे अहम पदों पर कार्य करते हुए उन्होंने सैन्य परियोजनाओं और भविष्य की रक्षा योजनाओं का अनुभव प्राप्त किया।
ऑपरेशन सिंदूर और उप प्रमुख पद
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान एयर मार्शल दीक्षित चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ के पद पर कार्यरत थे। जुलाई 2026 में उन्हें भारतीय वायुसेना का उप प्रमुख बनाया गया। अब वे वायुसेना की कमान संभालेंगे, जिसमें परिचालन तैयारियों को मजबूत करने और आधुनिक तकनीकों को अपनाने की उम्मीद है।
सम्मान और भूमिका
आशुतोष दीक्षित को कई सैन्य सम्मानों से नवाजा गया है, जिनमें 2006 में वायु सेना मेडल, 2011 में विशिष्ट सेवा मेडल, 2023 में अति विशिष्ट सेवा मेडल और 2026 में परम विशिष्ट सेवा मेडल शामिल हैं।
उनका अनुभव स्वदेशी रक्षा तकनीक और एलसीए तेजस जैसे विमानों को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण रहा है। वायुसेना प्रमुख के रूप में उनकी जिम्मेदारी बदलती सुरक्षा चुनौतियों से निपटना, लड़ाकू क्षमता बढ़ाना और आत्मनिर्भर भारत के तहत स्वदेशी रक्षा उपकरणों को प्रोत्साहित करना होगी।
सरकारी आदेश के अनुसार, उनका कार्यकाल 31 दिसंबर 2028 तक रहेगा।
स्रोत: tv9hindi.com


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