नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (NCTE) ने सेंट्रल टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (CTET) और स्टेट टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (STET) के लिए एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया में बदलाव करने का निर्णय लिया है। इस बदलाव के तहत ITEP (इंटीग्रेटेड टीचर एजुकेशन प्रोग्राम) के ग्रेजुएट्स अब CTET और STET में शामिल हो सकेंगे। NCTE ने इस विषय पर समीक्षा के लिए एक एक्सपर्ट कमेटी का गठन किया है।
ITEP क्या है और इसकी मान्यता
ITEP एक चार वर्षीय ग्रेजुएशन कोर्स है जिसे नई शिक्षा नीति 2020 के तहत शुरू किया गया है। इसे 12वीं के बाद किया जा सकता है और यह दो वर्षीय बीएड कोर्स के समकक्ष माना जाता है। वर्तमान में 409 हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूट्स को ITEP कराने की मंजूरी मिली है, जिनमें 777 यूनिट्स के माध्यम से 38,850 छात्रों को दाखिला मिलता है। हालांकि NCTE ने इस कोर्स को टीचिंग के लिए मान्यता दी है, लेकिन CTET और STET के लिए इसे अभी तक एलिजिबिलिटी में शामिल नहीं किया गया है।
NCTE की गठित कमेटी
NCTE की गठित कमेटी की अध्यक्षता दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन (CIE) के पूर्व प्रमुख प्रोफेसर चंद किरण सलूजा कर रहे हैं। इस कमेटी में NCERT, KVS, शिक्षा मंत्रालय, NCTE और CBSE के प्रतिनिधि भी शामिल हैं।
कमेटी का उद्देश्य और कार्य
यह कमेटी CTET और STET के वर्तमान एलिजिबिलिटी नियमों की समीक्षा करेगी और ITEP ग्रेजुएट्स को इन परीक्षाओं में शामिल करने के लिए आवश्यक बदलावों का सुझाव देगी। इसके अलावा, कमेटी मौजूदा नियमों में ITEP के अनुरूप सुधारों की भी सिफारिश करेगी। यह कदम इसलिए उठाया गया है क्योंकि ITEP का पहला बैच अकादमिक सत्र 2027-28 में पास होने वाला है, और टीचिंग पदों पर नियुक्ति के लिए टीईटी पास करना अनिवार्य है।
स्रोत: tv9hindi.com


टिप्पणियाँ
इस खबर पर सबसे पहले अपनी टिप्पणी करें।