NCERT ने 9वीं कक्षा की सोशल साइंस की किताब में पर्सनल फाइनेंस पर एक नया अध्याय जोड़ा है, जिसमें स्टूडेंट्स को EMI, FD और म्यूचुअल फंड समेत वित्तीय ज्ञान दिया जाएगा।
9वीं कक्षा में पर्सनल फाइनेंस की पढ़ाई
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) सहित अन्य बोर्डों के स्कूलों में 9वीं कक्षा के छात्रों को अब पर्सनल फाइनेंस के बारे में पढ़ाया जाएगा। छात्रों को यह सिखाया जाएगा कि वे अपनी पॉकेट मनी कहां निवेश कर सकते हैं और उधार लेने तथा व्यापार से संबंधित व्यवहारिक बातें भी समझाई जाएंगी। इसके लिए EMI, Fixed Deposit (FD) और म्यूचुअल फंड जैसे विषय शामिल किए गए हैं। NCERT ने अपनी 9वीं कक्षा की सोशल साइंस की किताब में पर्सनल फाइनेंस पर एक अध्याय जोड़ा है।
अर्थशास्त्री संजीव सान्याल का योगदान
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य और अर्थशास्त्री संजीव सान्याल ने इस अध्याय को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट की। उन्होंने बताया कि इस अध्याय में जोखिम उठाने, नवाचार और व्यापार को सकारात्मक रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो पुराने अध्यायों से अलग है, जहां इन विषयों को अक्सर गलत तरीके से दर्शाया जाता था।
"यह अध्याय जोखिम लेने, नवाचार और व्यापार को सकारात्मक गतिविधि के रूप में प्रस्तुत करता है, जो पिछली किताबों की तुलना में बिल्कुल अलग है," संजीव सान्याल ने लिखा।
पाठ्यपुस्तक में क्या-क्या शामिल है
NCERT की 9वीं कक्षा की सोशल साइंस "Understanding Society: India and Beyond" भाग 2 में अर्थशास्त्र के हिस्से में पर्सनल फाइनेंस का अध्याय शामिल है। इस अध्याय में आय, बजट बनाना, बचत, निवेश, सुरक्षा और जोखिम प्रबंधन जैसे पांच मुख्य पहलुओं पर चर्चा की गई है।
बचत के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट, सरकारी बचत योजनाएं, बॉन्ड, शेयर और म्यूचुअल फंड की जानकारी दी गई है। साथ ही महंगाई (मुद्रास्फीति), चक्रवृद्धि ब्याज (कंपाउंड इंटरेस्ट) और निवेश के जोखिमों का संभावित रिटर्न से संबंध समझाया गया है।
उधार लेने और टैक्स की समझ
अध्याय में उधार लेने (कर्ज लेने) के विषय में भी बताया गया है, जहां छात्रों को EMI (Equated Monthly Installment) और क्रेडिट पर सामान खरीदने की लागत के बारे में समझाया जाएगा। इसके अलावा, इनकम टैक्स और GST पर भी जानकारी दी गई है जिससे छात्र वित्तीय फैसलों के नतीजों को समझ सकें।
इस अध्याय को शामिल करने का उद्देश्य
संजीव सान्याल के अनुसार इस अध्याय का मकसद 14-15 साल के छात्रों को निवेशक बनाने का नहीं, बल्कि उन्हें पैसों की भाषा और वित्तीय निर्णयों के प्रभाव से परिचित कराना है। यह जीवन के लिए उपयोगी कौशल प्रदान करता है जो आगे चलकर उनकी आर्थिक समझ को मजबूत करेगा।
स्रोत: tv9hindi.com


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