आदिपुरुष के संवाद लेखक मनोज मुंतशिर ने 4 नवंबर को एक वीडियो संदेश में रामायण काल की तुलना बाबर के दौर से करते हुए भारत में दो परंपराओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बच्चों को बताया जाना चाहिए कि देश में दो तरह की परंपराएं हैं: बाबरी परंपरा और भारतीय परंपरा। यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही विवादित हो गया और कई लोगों ने उन्हें ट्रोल करना शुरू कर दिया।
मुख्य बातें
- मनोज मुंतशिर ने कहा कि रामायण की कहानी बार-बार सुनाना जरूरी है ताकि बच्चे समझ सकें।
- उन्होंने भारतीय परंपरा में राजा दशरथ के चार पुत्रों की कथा बताई।
- बाबरी परंपरा की तुलना शाहजहां के चार बेटों के बीच सत्ता संघर्ष से की।
- उन्होंने रामायण को हिन्दू-मुस्लिम विभाजन से ऊपर बताया।
- उनके इस बयान पर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं आईं।
मनोज मुंतशिर ने क्या कहा?
मनोज ने वीडियो में बताया कि रामायण की रीटेलिंग यानी बार-बार सुनाना इसलिए जरूरी है ताकि बच्चे तर्क के साथ रामभक्ति को समझ सकें। उन्होंने कहा, "हमारे देश में दो तरह की परंपराएं हैं। बाबरी परंपरा और भारतीय परंपरा। पहले दोनों का फर्क समझ लो, फिर चुनो।" उन्होंने भारतीय परंपरा में राजा दशरथ के चार बेटों राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न की कथा बताते हुए रामभक्ति की भावना और भाईचारे को उजागर किया।
इसके बाद उन्होंने बाबरी परंपरा की तुलना शाहजहां के पुत्रों की सत्ता संघर्ष की कहानी से की, जिसमें औरंगजेब ने अपने भाइयों का कत्ल करवा दिया था। उन्होंने कहा कि आपके सामने दो थालियां हैं, एक में राम की खड़ाऊ और दूसरी में एक कटा हुआ सिर। आप तय करें कि कौन सी थाली अपने घर ले जाना चाहते हैं।
मनोज ने यह भी कहा, "राम और रामायण को हिंदू-मुसलमान में बांटना ठीक नहीं है, क्योंकि रामायण महर्षि वाल्मीकि द्वारा लिखी गई थी, जब न तो मोहम्मद साहब थे, न जीसस। यह पूरी मानवता के लिए है।"
"रामायण के बारे में कोई भी निर्णय लेने से पहले, ये ज़रूर देख लें!"
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया
मनोज का यह वीडियो पोस्ट होते ही सोशल मीडिया पर विवाद शुरू हो गया। कई लोगों ने रामायण के युग की तुलना बाबर या औरंगजेब के दौर से करने पर आपत्ति जताई। कुछ ने आदिपुरुष फिल्म में उनके संवादों को याद दिलाया।
एक यूजर ने लिखा, "त्रेता युग को कंपेयर कर रहे हो कलयुग से, क्या ज्ञान है आपका।" दूसरे ने कहा, "1947 से हिंदुस्तान में बाबरी परंपरा कभी थी ही नहीं, 2014 के बाद ये याद आने लगी। रामायण की तुलना कर हमारे प्रभु का अपमान न करें।"
कुछ ने मनोज का मजाक उड़ाते हुए कहा कि आदिपुरुष के संवादों से अब भी जूझ रहे हैं। एक ने लिखा कि आदिपुरुष के वक्त इतना नहीं बोले थे जितना अब रामायण के समय बोल रहे हैं।
स्रोत: tv9hindi.com


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