मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करैरा में श्री राम कथा के दौरान धीरेंद्र शास्त्री द्वारा भगवान राम और भगवान श्रीकृष्ण की तुलना में की गई टिप्पणी से विवाद उत्पन्न हो गया है। उन्होंने भगवान कृष्ण के खड़े होने के अंदाज को 'टेढ़ा' बताया था, जिससे कई विपक्षी नेताओं ने उन्हें आलोचना का निशाना बनाया है।
विभिन्न नेताओं ने जताई नाराजगी
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि ईशनिंदा के लिए कभी क्षमा नहीं होनी चाहिए और ऐसे लोगों पर आजीवन प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। उन्होंने पूरे देश में धीरेंद्र शास्त्री के कार्यक्रम रद्द करने और उनका पूर्ण बहिष्कार करने की मांग की।
शिवसेना (यूबीटी) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि संत सूरदास और गोस्वामी तुलसीदास के बीच संवाद भगवान विष्णु के अलग-अलग स्वरूपों के प्रति भक्ति का प्रतीक था। उन्होंने धीरेंद्र शास्त्री की टिप्पणी को पवित्र त्रिभंगी मुद्रा का अपमान बताया और कहा कि किसी पवित्र स्वरूप की गरिमा को कमतर नहीं किया जाना चाहिए।
राजद और अन्य नेताओं की प्रतिक्रिया
राजद नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि भगवान राम और कृष्ण एक-दूसरे के पूरक हैं और इस तरह की टिप्पणियां अशोभनीय और अमर्यादित हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री और भाजपा नेताओं से माफी मांगने की मांग की।
एम-टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने भाजपा से सवाल किया कि वे धीरेंद्र शास्त्री को नियंत्रित क्यों नहीं कर पा रहे हैं और कहा कि अगर कोई और ऐसा कहता तो भाजपा की 'गैंग' हंगामा मचा देती।
छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी कहा कि इस मामले की जांच होनी चाहिए और धर्म की भावनाएं आहत हो रही हैं।
माफी के बाद भी जारी विवाद
विवाद बढ़ने पर धीरेंद्र शास्त्री ने एक वीडियो जारी कर हाथ जोड़कर माफी मांगी। उन्होंने कहा कि उनकी बात का गलत अर्थ निकाला गया है और उनका उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था। उन्होंने बताया कि यह केवल भक्ति रस में कही गई बातें थीं।
हालांकि, नेताओं और समुदाय के बीच यह विवाद अभी भी जारी है और इस मामले पर व्यापक चर्चा हो रही है।
स्रोत: deshbandhu.co.in


टिप्पणियाँ
इस खबर पर सबसे पहले अपनी टिप्पणी करें।